EMI ज़्यादा लग रही है? ऋणदाता से राहत कैसे माँगें
LoanReveal · अंग्रेज़ी में पढ़ें
EMI चूकने से पहले, जल्दी और लिखकर माँगें. ब्याज दर बदलने (रीसेट) पर RBI नियमों के तहत ऋणदाता को ज़्यादा EMI और लंबी अवधि में से चुनने का विकल्प देना होता है. रीसेट के अलावा अवधि बढ़ाना या राहत देना आम तौर पर ऋणदाता का फ़ैसला है, पर नियमित कर्ज़दार साफ़ वजह और व्यावहारिक प्रस्ताव के साथ माँगे तो कई ऋणदाता मान जाते हैं.
नियम क्या कहते हैं
- दर बदलने पर (बदलती दर के लोन), RBI के अगस्त 2023 के नियम: ऋणदाता ज़्यादा EMI, लंबी अवधि या दोनों का विकल्प दे, असर साफ़ बताए, और कभी भी आंशिक या पूरा भुगतान करने दे. फ़िक्स्ड दर पर जाने का विकल्प अक्टूबर 2025 से ऋणदाता के लिए वैकल्पिक है, अधिकार नहीं.
- स्टेटमेंट: अब तक चुकाया मूलधन व ब्याज, EMI, बची EMI और सालाना दर दिखाने वाला तिमाही स्टेटमेंट मिलना चाहिए.
- पीनल चार्ज, पीनल ब्याज नहीं: देरी पर वाजिब, बताया हुआ पीनल चार्ज लिया जा सकता है, पर लोन की दर में पीनल ब्याज नहीं जोड़ा जा सकता (2024 से).
- प्रीपेमेंट: व्यक्तियों के ग़ैर-कारोबारी बदलती दर के लोन पर पहले चुकाने का शुल्क नहीं लिया जा सकता, इसलिए EMI घटाने के लिए आंशिक भुगतान पर अतिरिक्त ख़र्च नहीं.
ऋणदाता क्या मना कर सकता है
- रीसेट के अलावा अवधि बढ़ाना अधिकार नहीं. ऋणदाता अपनी नीति, आपकी उम्र (ज़्यादातर 60 से 70 तक भुगतान चाहते हैं), भुगतान रिकॉर्ड और आय देखकर तय करता है.
- आर्थिक तंगी के लिए औपचारिक पुनर्गठन ऋणदाता की मर्ज़ी पर है, और यह क्रेडिट ब्यूरो को बताया जा सकता है, जिससे क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है. मानने से पहले पूछें कि इसे कैसे रिपोर्ट किया जाएगा.
- लंबी अवधि से EMI घटती है पर कुल ब्याज बढ़ता है. माँगने से पहले ख़र्च देखें.
लिखने से पहले
- आँकड़े निकालें. लंबी अवधि से EMI कितनी घटेगी और कितना ख़र्च बढ़ेगा, EMI या अवधि कैलकुलेटर और EMI कैलकुलेटर से देखें.
- विकल्प देखें. "EMI घटाएँ" के साथ आंशिक भुगतान, या बैलेंस ट्रांसफ़र से सस्ते ऋणदाता के पास जाना, ऋणदाता की मंज़ूरी के बिना EMI घटा सकता है.
- हो सके तो भरते रहें. EMI चूकने पर जुर्माना, क्रेडिट स्कोर पर चोट और कम विकल्प.
- हालात का सबूत जुटाएँ: सैलरी पत्र, नौकरी छूटने का पत्र या मेडिकल बिल. दस्तावेज़ों वाली अर्ज़ी पर बेहतर जवाब मिलता है.
शिकायत आगे कैसे ले जाएँ
ऋणदाता ने RBI नियम नहीं माने, जैसे रीसेट पर EMI-या-अवधि विकल्प नहीं दिया या बदलाव नहीं समझाया, और 30 दिन में शिकायत हल नहीं की, तो RBI लोकपाल से शिकायत कर सकते हैं.
ऋणदाता ने मर्ज़ी वाली माँग (रीसेट के बाहर अवधि बढ़ाना) सिर्फ़ मना की तो लोकपाल आम तौर पर उसे नहीं पलटता, क्योंकि इसे कारोबारी फ़ैसला माना जाता है. ऐसे में वजह लिखकर माँगें और ऊपर के विकल्प देखें.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अवधि बढ़ाकर EMI घटाने को बैंक से कह सकते हैं?
हाँ, हमेशा पूछ सकते हैं. रीसेट पर ज़्यादा EMI के बजाय लंबी अवधि का विकल्प देना ज़रूरी है. बाक़ी समय यह ऋणदाता का फ़ैसला है, उसकी नीति, उम्र सीमा और आपके रिकॉर्ड पर.
क्या अवधि बढ़ाने से क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है?
नियमित खाते पर सीधा अवधि बदलाव आम तौर पर नहीं. आर्थिक तंगी के कारण औपचारिक पुनर्गठन ब्यूरो को बताया जा सकता है और स्कोर पर असर डाल सकता है. मानने से पहले पूछें.
अगर EMI पहले ही चूक गई हो?
तुरंत ऋणदाता से संपर्क करें, जितना हो सके भरें, और विकल्पों के बारे में लिखकर पूछें. खाता जितना लंबा बकाया रहे, विकल्प उतने कम और स्कोर पर असर उतना ज़्यादा.
क्या लंबी अवधि अच्छा विचार है?
EMI घटती है पर कुल ब्याज बढ़ता है. हालात सुधरें तो पहले चुकाकर अवधि फिर घटा सकते हैं.